भैरव बाबा की भक्ति करने वाला व्यक्ति सदैव निर्भय रहता है : पंडित शिवकुमार

अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा

हरिद्वार। भैरव बाबा की महिमा बड़ी ही अपरंपार है भैरव उपासक उमा बिहार हरिपुर कला स्थित इच्छापूर्ति भैरव धाम मंदिर जहां आने वाले सभी भक्तों को मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है भगवान भैरवनाथ के दरबार मेंआने वाले सभी भक्तों केभैरवनाथ सभी कष्ट हर लेते हैं। इस अवसर पर एक विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया भैरवनाथ उपासक पंडित श्री शिव कुमार ने भैरव महिमा का गुणगान करते हुए कहाभैरव बाबा, जिन्हें काल भैरव, भैरवनाथ या भैरव देव के नाम से भी जाना जाता है, भगवान शिव के अति प्रचंड और रक्षक रूप माने जाते हैं। भैरव बाबा को समय के स्वामी — “काल के अधिपति” — कहा गया है। वे न केवल भक्तों के रक्षक हैं, बल्कि धर्म की मर्यादा और न्याय के प्रहरी भी हैं।

भैरव बाबा का उद्भवपुराणों के अनुसार, एक बार ब्रह्मा जी ने अहंकारवश भगवान शिव का अपमान किया। तभी शिव जी ने अपने क्रोध से भैरव का प्रकट किया। भैरव ने ब्रह्मा के अहंकार का नाश किया और धर्म की रक्षा के लिए उत्पन्न हुए। इसीलिए उन्हें काल भैरव कहा जाता है — जो समय और अहंकार दोनों का अंत कर देते हैं।

भैरव बाबा का रूप अत्यंत उग्र और वीरतापूर्ण है। वे काले वर्ण के, त्रिशूलधारी, कराल मुख वाले और कुत्ते पर सवार रहते हैं। उनके हाथ में त्रिशूल, खड्ग और खप्पर रहता है, जो बुराई के नाश और अधर्म के विनाश का प्रतीक है।

उनके साथ सदा एक काला कुत्ता रहता है, जो भैरव बाबा का वाहन और विश्वसनीय साथी माना जाता है। यह कुत्ता “विश्वास और निष्ठा” का प्रतीक है।भैरव बाबा की आराधना करने से भक्त को निडरता, साहस, आत्मविश्वास और सुरक्षा का वरदान मिलता है। कहा जाता है कि भैरव बाबा की पूजा से भूत-प्रेत, नकारात्मक ऊर्जा, तंत्र-मंत्र, और दुष्ट शक्तियाँ पास नहीं आतीं।भैरव बाबा के आठ प्रमुख रूप माने गए हैं — अष्ट भैरव: काल भैरव, संहार भैरव, रुद्र भैरव, अनंत भैरव, क्रोध भैरव, कपाली भैरव, भीषण भैरव और संहारक भैरव।इन सभी में काल भैरव सबसे प्रमुख हैं, जिनकी पूजा विशेष रूप से मार्गशीर्ष मास की अष्टमी को की जाती है, जिसे काल भैरव अष्टमी कहा जाता है।जो भी व्यक्ति सच्चे मन से भैरव बाबा की उपासना करता है, उसके जीवन से भय, रोग और शत्रुता समाप्त हो जाती है।भैरव बाबा साधक को सत्य, तप, और पराक्रम का वरदान देते हैं। वे भक्त के जीवन से संकटों को दूर करते हैं और उसे सफलता के मार्ग पर अग्रसर करते हैं।

कहावत है जो ध्यावे तन मन कर हरे।भारत में कई प्रसिद्ध भैरव मंदिर हैं — जैसे काशी के काल भैरव मंदिर, उज्जैन के काल भैरव, दिल्ली का भैरव मंदिर, जयपुर का भैरवनाथ मंदिर आदि। कहा जाता है कि काशी में बिना काल भैरव के दर्शन किए वाराणसी यात्रा अधूरी रहती है।

भैरव बाबा की पूजा प्रातःकाल या मध्य रात्रि में की जाती है। भक्त उन्हें तेल का दीपक, सिंदूर, काले तिल, नींबू और शराब का अर्पण करते हैं (यह तांत्रिक परंपरा का एक प्रतीक है)।

 

भैरव बाबा केवल क्रोध के देवता नहीं, बल्कि न्याय, रक्षा और सत्य के प्रतीक हैं। वे अपने सच्चे भक्तों की रक्षा करते हैं, उन्हें भयमुक्त जीवन प्रदान करते हैं, और हर बुराई से दूर रखते हैं।

उनकी कृपा से व्यक्ति में धैर्य, विवेक और शक्ति का संचार होता है। भैरव बाबा की भक्ति करने वाला व्यक्ति सदैव निर्भय रहता है, क्योंकि भैरव स्वयं उसकी रक्षा करते हैं।

जय काल भैरव भगवान,

भक्तों के रखवाले महान भैरव उपासक पंडित शिवकुमार ने बताया जो सच्चे मन से उमा बिहार स्थित भैरव भवन में बाबा भैरवनाथ के दर्शन करता है उसके जीवन के सभी संताप समाप्त हो जाते हैं भगवान भैरवनाथ की कृपा से उसके भाग्य का उदय हो जाता है उसके घर में सुख शांति समृद्धि का वास होता है और भगवान भैरवनाथ के दर्शन करने मात्र से उनका मानव जीवन सार्थक हो जाता है उनके भैरवनाथ सभी कष्ट दुख दर्द समाप्त कर देते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!