अजय वर्मा, अश्वनी वर्मा
हरिद्वार। ब्रह्मपुरी स्थित चिन्मय कुटी में परमात्मा स्वरुप पूज्य गुरुदेव श्री श्री 108 स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी महाराज जीकी पतित पावन स्मृति में 46 वा वार्षिक भंडारा प्रातः स्मरणीय परम पूज्य गुरुदेव स्वामी चिद् घनानन्द महाराज (उर्फ सुभाष गोयल जी)के पतित पावन सानिध्य में बड़े ही धूमधाम हर्षोल्लास के साथ संत महापुरुषों की गरिमा मय उपस्थित के बीच संपन्न हुआ इस अवसर पर बोलते हुए स्वामी चिद् घनानन्द महाराज ने कहा सतगुरु देव की महिमा का कोई अंत नहीं है क्योंकि वे साक्षात् ब्रह्म का ही स्वरूप होकर इस धरा पर अवतरित होते हैं और भटके हुए जीवों को सत्य के मार्ग पर लाकर उनका हाथ थाम लेते हैं। जैसे कस्तूरी मृग अपनी ही नाभि की सुगंध को बाहर ढूंढता फिरता है वैसे ही मनुष्य ईश्वर को बाहर खोजता है परंतु सतगुरु ही वह पारखी होते हैं जो हमारी दृष्टि को अंतर्मुखी कर हमारे भीतर ही परमात्मा के दर्शन करा देते हैं। उनके पावन वचन केवल शब्द नहीं बल्कि वह दिव्य मंत्र हैं जो हमारे हृदय की कठोरता को कोमलता में बदल देते हैं और हमारे जीवन की दिशा को स्वार्थ से हटाकर परमार्थ की ओर मोड़ देते हैं। जिस प्रकार तपती धूप में एक विशाल वृक्ष की छाया शांति प्रदान करती है ठीक उसी प्रकार संसार के कष्टों और दुखों से झुलसते हुए मन को गुरु के चरणों में ही विश्राम प्राप्त होता है। गुरुदेव हमारे जीवन के विकारों को दूर कर हमें उस योग्यता के योग्य बनाते हैं कि हम स्वयं को पहचान सकें और उस परम सत्ता में विलीन हो सकें जिसे पाना ही मानव जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है। वे हमारे कर्मों के बंधनों को काटते हैं और हमें मोह-माया के जाल से निकालकर निष्काम भक्ति की ओर ले जाते हैं जिससे हमारा वर्तमान तो सुखद होता ही है साथ ही मृत्यु के पश्चात की यात्रा भी निर्भय और मंगलमयी हो जाती है। यह सत्य है कि ईश्वर की कृपा होने पर गुरु मिलते हैं लेकिन गुरु की कृपा होने पर स्वयं साक्षात् ईश्वर मिल जाते हैं इसलिए गुरु चरणों की सेवा ही इस ब्रह्मांड की सबसे बड़ी पूजा और साधना है। इस अवसर पर बोलते हुए स्वामी सच्चिदानंद महाराज (उर्फ़ जन्नत )ने कहा गुरु चरणों की पावन राज से यह मानव जीवन धन्य तथा सार्थक हो जाता है सतगुरु के पावन वचन हमारे मानव जीवन का उद्धार कर देते हैं एवं लोक एवं परलोक दोनों सुधार देते हैं श्री अतुल मैखुरी (गोपाल जी)ने कहा इस पृथ्वी लोक पर गुरु ईश्वर के प्रतिनिधि के रूप में हम लोगों के मार्गदर्शन हेतु अवतरित होते हैं और गुरु का पावन सानिध्य हमारे मानव जीवन को धन्य तथा सार्थक कर देतास्वामी पूर्णानंद गिरी महाराज स्वामी सच्चिदानंद गिरी महाराज उर्फ़ जीन्नतश्रीमती अंजू अरोड़ा अजय गुप्ता अजय ग्रोवर बबलू अंबिका आनंद जैन आशुतोष गर्ग नरेश शर्मा बलजिंदर ओमप्रकाश गोयल जगदीप नंदलाल सेठी रमेश सेठी जवाहर दास विजय मोगा कमल दर्शन करण सेठी सागर सागर शेट्टी किरण शर्मा कमलेश ग्रोवर नरेश मोगा प्रज्ञा लक्ष्मी गोयल राधा बिष्ट संजीव मोगा कैलाश बब्बर सीमा गुंबर सीमा मोगा अशोककुमार लज्जा धीरज सहित भारी संख्या में अनेकों प्रदेशों से आये भक्तजन उपस्थित थे सभी ने संत महापुरुषों के श्री मुख से बही ज्ञान की सरिता में स्नान कर अपने जीवन को धन्य तथा कृतार्थ किया इस अवसर पर आयोजित विशाल भंडारे में सभी ने प्रसाद ग्रहण किया।
